हैं दोनों ही अंश तुम्हारा, दुनिया को यह संदेश दो। हैं दोनों ही अंश तुम्हारा, दुनिया को यह संदेश दो।
न अबला असहाय है सह न अत्याचार तू न अबला असहाय है सह न अत्याचार तू
घर-घर दुष्ट कंस पैदा हो गए हैं। हे सुदर्शन चक्रधारी, उनका वध करने को आओ ना।। घर-घर दुष्ट कंस पैदा हो गए हैं। हे सुदर्शन चक्रधारी, उनका वध करने को आओ ना...
और कोलाहल ? और कोलाहल ?
और फिर... और फिर...
और हम उनकी यादों में खोये रहते हैं... और हम उनकी यादों में खोये रहते हैं...